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चीन-Pok के लिए विनाशकारी हो सकता है 21 जून का सूर्य ग्रहण, 58 वर्ष पहले 1962 में भी ऐसा ही योग हुवा था

Banswara
चीन-Pok के लिए विनाशकारी हो सकता है 21 जून का सूर्य ग्रहण, 58 वर्ष पहले 1962 में भी ऐसा ही योग हुवा था
@HelloPratapgarh -

21 जून रविवार की सुबह साल का पहला और आखिरी सूर्यग्रहण, जो भारत में दिखेगा।  सूर्यग्रहण सुबह 10.14 बजे से शुरू होगा। ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ग्रहण खत्म होने तक रहता है। इसलिए इसका सूतक शनिवार रात 10.14 बजे से शुरू होगा और दोपहर 1.38 बजे तक रहेगा। सूतक के समय पूजा-पाठ नहीं किए जाते हैं। इस समय में सिर्फ मंत्र जाप कर सकते हैं।  ग्रहण खत्म होने के बाद पूजा-पाठ किए जा सकेंगे।

आपको बता दे कि 5 जून को चंद्र ग्रहण हुआ था, 21 जून को सूर्य ग्रहण है और 5 जुलाई को फिर से चंद्र ग्रहण होगा। 5 जून और 5 जुलाई के चंद्र ग्रहण मांद्य चंद्र ग्रहण है तो इसका धार्मिक महत्व नहीं है। इस तरह 30 दिन में तीन ग्रहण का दुर्लभ योग 1962 में हुवा था और भविष्य में 119 साल बाद बनेगा।

58 साल पहले 1962 में शनि के मकर राशि में वक्री रहते हुए 17 जुलाई को चंद्र ग्रहण, 31 जुलाई को सूर्य ग्रहण और 15-16 अगस्त की मध्य रात्रि में चंद्र ग्रहण हुआ था। उस समय भी चंद्र ग्रहण की धार्मिक मान्यता नहीं थी और उस दौरान भी भारत-चीन के बीच युद्ध हुआ था और फिर 1 सितंबर 1962 को ईरान में भारी भूकंप आया था। 2020 में भी ऐसे ही योग बन रहे हैं। 

119 साल बाद 2139 में 11-12 जुलाई की रात चंद्र ग्रहण, 25-26 जुलाई को सूर्य ग्रहण और इसके बाद 9-10 अगस्त की दरमियानी रात में चंद्र ग्रहण होगा। उस समय भी इन चंद्र ग्रहणों का धार्मिक महत्व नहीं रहेगा।

चीन-Pok के लिए विनाशकारी हो सकता है 21 जून का सूर्य ग्रहण

21 जून को होने वाले सूर्यग्रहण PoK कश्मीर के लिए विनाशकारी रहेगा और चीन और उससे जड़ुे भूभागों के लिए भी काफ़ी ख़राब रहेगा। 6वी शताब्दी में लिखित 'बृहत्संहिता ग्रन्थ' जिसके लेखक देवज्ञ ज्योतिष आचार्य वराहमिहिर है। इस ग्रन्थ एक श्लोक में बताया गया है की आषाढ़ माह में लगने वाला सूर्यग्रहण धरती के कुछ भूभागों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। उन भूभागों में गांधार, PoK, कश्मीर एवं चीन शामिल है।

देवज्ञ ज्योतिष आचार्य वराहमिहिर के ज्योतिष सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है एवं सभी ज्योतिषी इनका पालन करते है। कश्मीर में आतंकवादी बौखलाये हूवे है, और इसी बौखलाहट में उत्तर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी न किसी आतंकवादी साजिश को अंजाम दे सकते है। 21 जून को मिथुन राशि पर लगने वाला सूर्यग्रहण इन जगहों को काफी नुकसान पंहुचा सकता है क्यूंकि इन ग्रहो का योग काफी नुकसानदायक है। ग्रहो का यह योग उत्तर भारत के सीमावर्ती देशों में लोगो का विद्रोह, प्राकृतिक आपदा, सैन्य कार्यवाही या युद्ध का कारण बन सकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में युद्ध की प्रबल संभावना बनी रहेंगी। इन्ही ग्रहों के योग से चीन का नाश हो सकता है, इसलिए चीन का कुछ भी करना उसे बैकफुट पर रखेगा। भारत पर सूर्यग्रहण का प्रभाव मध्यवर्ती भूभाग के लिए बुरा हो सकता है और संपूर्ण देश में अराजकता की वृद्धि और अग्निकांड भी हो सकता है।

ज्योतिषी भवानी खंडेलवाल

2-ए-17, हाउसिंग बोर्ड, बांसवाड़ा 

9414101332

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